हरियाणा विधानसभा में वर्ष 2014 के बाद कांग्रेस जब-जब बीजेपी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई, हर बार वह बिना दमखम के सदन में गिर गया। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन नायब सिंह सैनी सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी इसी सिलसिले की एक और कड़ी बन गया और बहस के बाद बिना किसी मुकाबले के गिर गया। अब तक कांग्रेस ने तीन कोशिशें की हैं लेकिन एक भी कामयाब नहीं हुई। हरियाणा विधानसभा में 2014 के बाद मार्च 2021 में मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव वोटिंग में गिर गया। फरवरी 2024 में नायब सिंह सैनी सरकार के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव वॉकआउट के कारण निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंच सका।
बार फिर अविश्वास की राजनीति बहुमत के सामने टिक नहीं पाई
दिसंबर 2025 में एक बार फिर अविश्वास की राजनीति बहुमत के सामने टिक नहीं पाई। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। कांग्रेस ने सरकार पर कई आरोप लगाए, लेकिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक-एक आरोप का जवाब तथ्यों और तर्कों के साथ दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का महत्व है, लेकिन वह तभी सार्थक होती है जब तथ्य, सच्चाई और जमीनी हकीकत उसके साथ खड़ी हो। इतना ही नहीं बीजेपी के मंत्री कृष्ण बेदी ने जिस तरह कांग्रेस को एक एक मुद्दे पर पर घेरा वो ये साफ दिखा रहा था कि विपक्ष एकदम लाचार है। कांग्रेस के नो विधायकों को नेम किया गया तो नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुडा ने स्पीकर के सामने अनुरोध किया जिसके बाद विधायकों को बुलाया गया। अगर स्पीकर उन्हें न बुलाते तो शायद अविश्वास प्रस्ताव पूरे समय से पहले ही गिर जाता।
इसमें न तो गंभीरता है और न ही ठोस आंकड़े
राजनीति के जानकारों की माने तो कांग्रेस बिना तैयारी के ही इस बार सदन में थी। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव की भाषा और सामग्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव जल्दबाजी में केवल औपचारिकता निभाने के लिए लाया गया प्रतीत होता है। इसमें न तो गंभीरता है और न ही ठोस आंकड़े। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पूरे अविश्वास प्रस्ताव में केवल एक ही आंकड़ा है और महंगाई जैसे अहम मुद्दे का कहीं उल्लेख तक नहीं है, जो यह संकेत देता है कि विपक्ष भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महंगाई पर नियंत्रण को स्वीकार कर चुका है। ‘लोकतंत्र को तंत्र-लोक में बदलने’ के आरोप पर मुख्यमंत्री सैनी ने विपक्ष को शब्दों के सही अर्थ की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि तंत्र-लोक कोई अपशब्द नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन का एक महान ग्रंथ है, जिसकी रचना 10वीं शताब्दी में आचार्य अभिनव गुप्त ने की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस के विधायक अब शब्दों के अर्थ और संदर्भ भी भूल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने शायराना अंदाज में कहा— शब्द जब अर्थ खो देते हैं, तो संवाद शोर बन जाता है।
विपक्ष की रणनीति और उसकी राजनीतिक तैयारी पर गंभीर सवाल छोड़ गया
इस टिप्पणी के साथ ही सत्ता पक्ष की बेंचों से तालियों की गूंज सुनाई दी। लंबी बहस के बाद जब अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की बारी आई, तो कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद सरकार ने आसानी से अपना बहुमत सिद्ध कर दिया और अविश्वास प्रस्ताव स्वत: ही गिर गया। यह घटनाक्रम विपक्ष की रणनीति और उसकी राजनीतिक तैयारी पर गंभीर सवाल छोड़ गया। तीन कोशिशें, एक भी कामयाब नहीं हरियाणा विधानसभा में 2014 के बाद अब तक कांग्रेस द्वारा तीन बार अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया गया- मार्च 2021 में मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव वोटिंग में गिर गया। फरवरी 2024 में नायब सिंह सैनी सरकार के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव वॉकआउट के कारण निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंच सका। दिसंबर 2025 में एक बार फिर अविश्वास की राजनीति बहुमत के सामने टिक नहीं पाई।
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