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The Haryana Story | संसद के दोनों सदनों में उठा 'भारी स्कूल बैग' का मुद्दा, डिजिटल शिक्षा या लॉकर जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की अपील

संसद के दोनों सदनों में उठा 'भारी स्कूल बैग' का मुद्दा, डिजिटल शिक्षा या लॉकर जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की अपील

स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए और स्कूलों को अपने वार्षिक कैलेंडर में बैगलेस डे को शामिल करना अनिवार्य

भारी स्कूल बैग यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है जिसे हाल ही में संसद के दोनों सदनों में उठाया गया है। लोकसभा सांसद रामबीर सिंह बिधूड़ी ने बच्चों द्वारा अपने शरीर के वजन से कहीं अधिक भारी स्कूल बैग ढोने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह ने इस बात को रेखांकित किया कि स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों में अब पीठ, कंधों और गर्दन का दर्द एक पुरानी समस्या बनता जा रहा है।

डिजिटल शिक्षा या लॉकर जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की अपील

दोनों सांसदों ने सरकार से 'स्कूल बैग नीति' को कड़ाई से लागू करने और डिजिटल शिक्षा या लॉकर जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने की अपील की है ताकि बच्चों का बोझ कम हो सके। बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, स्कूल बैग का वजन बच्चे के कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य जोखिम: भारी बैग के कारण बच्चों में 'काइफोसिस' (कुबड़ निकलना), मांसपेशियों में खिंचाव और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। जिसके चलते बच्चों के इस दर्द व परेशानी को समझते हुए संसद में यह मुद्दा उठाया गया। 

कंधों और गर्दन में दर्द अब रोज की शिकायत

गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल बैग का वजन सीमित रखने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है। हर सुबह फरीदाबाद की गलियों में स्कूल जाते बच्चों की पीठों पर किताब कापी से भरे भारी बैग लदे होते हैं। कई बच्चे बस स्टॉप तक पहुंचते-पहुंचते थक जाते हैं तो कई के कंधों और गर्दन में दर्द अब रोज की शिकायत बन चुका है। लोकसभा में सांसद रामबीर बिधूडी ने और राज्यसभा में सांसद डॉ. भीम सिंह ने बच्चों के इस दर्द व परेशानी को समझा और संसद में यह मुद्दा उठाया है। उन्होंने स्कूल बैग के बढ़ते वजन पर चिंता जाहिर करते हुये स्कूल बैग का बजन करने की मांग की। 

वार्षिक कैलेंडर में बैगलेस डे को शामिल करना अनिवार्य

दोनों सांसदों द्वारा उठाये गये इस मुददे के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल बैग का वजन सीमित रखने के स्पष्ट निर्देश हैं। शिक्षा मंत्री ने संसद सत्र में बताया कि स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए और स्कूलों को अपने वार्षिक कैलेंडर में बैगलेस डे को शामिल करना अनिवार्य है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को स्कूल बैग नहीं दिया जाना चाहिए जबकि अन्य कक्षाओं के लिए बैग के वजन की अधिकतम सीमा। पहली और दूसरी कक्षा : 1.6 - 2.2 किग्रा तीसरी से पांचवीं तक- 1.7 - 2.5 किग्रा छठी और सातवीं- 2 - 3 किग्रा आठवीं- 2.5 - 4 किग्रा नौवीं और दसवीं- 2.5 - 4.5 किग्रा ग्यारहवीं और बारहवीं- 3.5 - 5 किग्रा तय की गई है। 

बच्चे अब भी भारी-भरकम बैग लेकर स्कूल जाने को मजबूर

मंत्रालय ने स्वीकार किया कि नियम होने के बावजूद कई स्कूलों में बच्चे अब भी भारी-भरकम बैग लेकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कई जगह इनका पालन नहीं हो रहा। इस नियम का सख्ती से पालन कराया जायेगा। निजी स्कूलों पर निगरानी बढ़ाई जायेगी। संसद में उठे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस बिरदी ने खुशी जाहिर करते हुये उम्मीद जताई है कि अब सरकार और शिक्षा विभाग सख्ती दिखाएंगे और नियमों का सही तरीके से पालन करायेंगे। जिससे हजारों बच्चों को रोजाना ढोए जाने वाले भारी भरकम बैग से राहत मिल सके।

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