23 दिसंबर, 2025 को हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी एक आदेश मार्फत एचसीएस (हरियाणा सिविल सेवा) - ईबी (एग्जीक्यूटिव ब्रांच - कार्यकारी शाखा) अर्थात प्रदेश सिविल सेवा (ग्रुप-ए) की स्वीकृत कैडर संख्या को 3 वर्षों के लिए 319 निर्धारित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की वेबसाइट पर सेवारत एचसीएस अधिकारियों की संख्या हालांकि 258 दर्शाई जा रही है। बता दें कि इससे पूर्व अक्टूबर, 2020 में एचसीएस कैडर संख्या को प्रदेश सरकार द्वारा 307 निर्धारित किया गया था जो निर्धारण हालांकि 3 वर्षों के लिए अर्थात अक्टूबर, 2023 तक ही था। वास्तव में हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) नियमावली, 2008 के नियम 3 के अंतर्गत 3 वर्षों की समयावधि के लिए ही एचसीएस कैडर संख्या निर्धारण किया जाता है।
एचसीएस कैडर संख्या निर्धारण में 2 वर्ष का समय कैसे लग गया ?
अक्टूबर, 2020 के बाद प्रदेश सरकार द्वारा ऐसा कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया गया, जिसमें उल्लेख हो कि एचसीएस कैडर संख्या निर्धारण के अगला नियमित आदेश जारी होने तक उपरोक्त कैडर संख्या पूर्ववत की भांति 307 ज्यों की त्यों ही बनी रहेगी। बहरहाल, अब 2 वर्षों से ऊपर के विलंब के साथ एचसीएस कैडर संख्या को पिछली निर्धारित संख्या 307 से 12 बढ़ाकर 319 किया गया है। अब ताजा एचसीएस कैडर संख्या निर्धारण में 2 वर्ष का समय कैसे लग गया, इस संबंध में प्रदेश के कार्मिक विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं। ताजा जारी आदेश में एचसीएस-कैडर संख्या को 307 से 12 बढ़ाकर 319 दर्शाया जाना मात्र आंकड़ों का खेल है जिस पर गंभीर सवाल उठाना स्वाभाविक है।
जीएम हरियाणा रोडवेज के तो पहले ही केवल 12 पद ही एचसीएस कैडर के लिए थे
5 साल पहले 12 जिलों के जीएम हरियाणा रोडवेज 34 पदों को स्पष्ट तौर पर एचसीएस अधिकारियों के लिए निर्धारित किए थे, अक्टूबर, 2020 में जारी एचसीएस कैडर संख्या आदेश में प्रदेश में सभी तत्कालीन 22 जिलों में आरटीए (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) सचिव के पद, जबकि 12 जिलों के जीएम (जनरल मैनेजर) हरियाणा रोडवेज के पद अर्थात कुल 34 पदों को स्पष्ट तौर पर सीनियर स्केल से सिलेक्शन ग्रेड अर्थात 5 वर्ष से 15 वर्ष तक की सेवा वाले एचसीएस अधिकारियों के लिए निर्धारित किया गया था परंतु चूंकि उस आदेश के जारी होने के बाद प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग द्वारा उपयुक्त पदों पर लागू सेवा नियमों में संशोधन कर जिला आरटीए सचिव (जिसका नाम वर्ष 2021 में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर- डीटीओ कर दिया गया था) के पदों को राज्य सरकार के अन्य विभागों के योग्य एवं उपयुक्त ग्रुप-ए अधिकारियों से भरे जाने संबंधी व्यवस्था कर दी गई। जीएम हरियाणा रोडवेज के तो पहले ही केवल 12 पद ही एचसीएस कैडर के लिए थे। इसका अर्थ है कि अब उक्त दोनों प्रकार के पद विशेष तौर पर एचसीएस कैडर के लिए नहीं हैं। हालांकि, एचसीएस अधिकारी उपरोक्त पदों पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) आधार पर तैनात हो सकते हैं।
इन सभी पदों पर एचसीएस अधिकारियों की ही प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात होनी हो, जोकि सही नहीं
22 जिलों (अब हांसी के बाद 23 जिले) में से केवल 6 जिलों में एचसीएस अधिकारी बतौर डीटीओ-कम-आरटीए सचिव तैनात 23 दिसंबर को जारी एचसीएस संख्या निर्धारण आदेश में उक्त सभी 34 पदों को एचसीएस कैडर के लिए ही डेपुटेशन रिजर्व में जोड़ दिया गया है जैसे कि इन सभी पदों पर एचसीएस अधिकारियों की ही प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात होनी हो जोकि सही नहीं है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों (अब हांसी के बाद 23 जिले) में से केवल 6 जिलों कैथल, अंबाला, पलवल, रोहतक, फतेहाबाद और सिरसा में ही एचसीएस अधिकारी बतौर डीटीओ-कम-आरटीए सचिव तैनात हैं। बाकी जिलों में अन्य ग्रुप-ए अधिकारी इन पदों पर तैनात है। जीएम (जनरल मैनेजर) हरियाणा रोडवेज के पद पर केवल गुरुग्राम, फरीदाबाद और हिसार में ही इस पद पर एचसीएस अधिकारी तैनात है।
सत्तासीन सरकारें अपनी इच्छा और मनमर्जी से एचसीएस कैडर में फेरबदल करती रही
हेमंत ने बताया कि हरियाणा में प्रशासनिक आवश्यकताओं की अपेक्षा आमतौर पर सत्तासीन सरकारें अपनी इच्छा और मनमर्जी से एचसीएस कैडर में फेरबदल करती रही हैं। अक्टूबर, 2014 में हरियाणा में मनोहर लाल के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद नवंबर, 2014 में एचसीएस कैडर की तत्कालीन संख्या जिसे पूर्ववर्ती भूपेंद्र हुड्डा सरकार द्वारा सितंबर, 2011 में 263 निर्धारित किया गया था, उसे कुछ समय के लिए ज्यों का त्यों रखने का निर्णय लिया गया था। उसके करीब अढ़ाई वर्ष बाद मई, 2017 को एचसीएस कैडर संख्या को बढ़ाकर 300 कर दिया था। हालांकि, नवंबर, 2003 में भी तत्कालीन ओमप्रकाश चौटाला सरकार द्वारा एचसीएस कैडर संख्या को बढ़ाकर 300 किया गया था परंतु जैसे ही मार्च, 2005 में भूपेंद्र हुड्डा सरकार बनी तो मई, 2005 में इस संख्या को पहले 70 घटाकर 230 कर दिया गया था जिसे 3 वर्ष बाद अगस्त, 2008 में 10 और घटाकर 220 कर दिया गया था जिसे फिर सितंबर, 2011 में बढ़ाकर 263 किया गया था।
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