जयदीप राठी मामले में सोमवार को भी इनेलो कार्यकर्ता लघु सचिवालय पहुंचे तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। राठी के समर्थकों व इनेलो कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि पुलिस शुरूआत में ही कार्रवाई करती तो आज यह दिन नहीं देखने पड़ते। इस मौके पर समर्थकों ने कहा कि कम से कम पुलिस परिजनों को डेड बॉडी ही लाकर दे दें। 27 दिसंबर से लेकर 4 जनवरी तक पुलिस अधिकारी परिजनों को आश्वासन ही देते रहे लेकिन जब हाथ में कुछ नहीं रहा तो चुपके से घर बताने आ गए कि जयदीप राठी अब हमारे बीच नहीं रहा।
पुलिस प्रशासन से विश्वास ही उठ चुका, हमें 10 दिन से मीठी गोली देते रहे
इस मौके पर पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर, इनेलो नेता हेमराज जागलान, प्रेम सिंह भालसी, धर्मबीर पाढा, रामकुमार नंबरदार, एडवोकेट वैभव देशवाल, नवीन नैन भालसी, कपिल बुद्धिराजा, राजू नांदल, सुनीता शर्मा, कृष्ण डिमाना, सहित काफी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। एडवोकेट राजेंद्र जागलान ने कहा कि हमें जिंदा लाने का भरोसा दिया था अब कम से कम हमें डैड बॉडी तो लाकर दे दो। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन का फेलियर है और बड़े नेताओं की मिलीभगत है। एडवोकेट वैभव देशवाल ने कहा कि यदि पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो जयदीप हमारे बीच होता। इस मौके पर सुनीता शर्मा ने कहा कि हमारा तो पुलिस प्रशासन से विश्वास ही उठ चुका है हमें 10 दिन से मीठी गोली देते रहे। एस.पी. व सी.आई.ए. की टीम घर पर आकर आश्वासन देते रहे कि जयदीप सुरक्षित है और खरोंच भी नहीं आई है।
आम आदमी के साथ कैसे सलूक होता होगा ?
यदि इनेलो के जिला प्रधान के भाई व सोशल वर्कर, सरकारी पद पर रहे जयदीप के साथ यह हो रहा है तो आम आदमी के साथ कैसे सलूक होता होगा। जयदीप मामले में एक आरोपी जसवंत उर्फ जस्सी को आठ दिन के रिमांड पर लिया गया है जबकि दूसरा आरोपी पुलिस मुठभेड में घायल होने पर अस्पताल में उपचाराधीन है।
27 दिसंबर शाम से उनका फोन भी बंद हा रहा
जयदीप राठी के बेटे प्रतीक ने 28 दिसंबर को दर्ज करवाया था मामला जयदीप राठी के बेटे प्रतीक ने 28 दिसंबर को थाना सेक्टर 13-17 में पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसका पिता जयदीप राठी 27 दिसंबर को सुबह करीब 9 बजे घर से गाड़ी लेकर ड्यूटी पर जाने की बात कहकर निकले थे। वह सरकारी अस्पताल में ऑप्थेल्मिक ऑफिसर के पर तैनात है। जो अस्पताल नहीं पहुंचे और 27 दिसंबर शाम से उनका फोन भी बंद हा रहा है। थाना सेक्टर13-17 में प्रतीक की शिकायत पर अभियोग दर्ज कर पुलिस ने जयदीप राठी की तलाश शुरू कर दी थी।
सी.सी.टी.वी. फुटेज न मिलती तो शायद इतनी जल्दी मामले का खुलासा न होता
पुलिस व परिजनों के लिए सी.सी.टी.वी. की फुटेज काफी कारगर साबित रही। पुलिस व घर वालों ने उसी दिन छानबीन शुरू कर दी थी इसमें कुछ फुटेज व वीडियो क्लिप मिली थी। फुटेज व वीडियो क्लिप को देखते हुए पुलिस टीम ने जीटी रोड पर पता किया वह 27 दिसम्बर को अपने फार्म हाउस पर गए थे। वहां से अपनी गाड़ी में बैठकर चंडीगढ की और जाते दिखाई दिए। पुलिस ने उक्त मार्ग पर मिली फुटेज का अध्ययन किया जीरकपुर में एक गाड़ी में बैठते हुए दिखाई दिए। गाड़ी में और दो अन्य व्यक्ति भी साथ थे। फिर एक अन्य फुटेज में जयदीप राठी गाड़ी में नहीं दिखे वहीं दोनों युवक गाड़ी को ले जाते हुए दिखाई दिए। दोनों व्यक्ति वही थे जो जयदीप राठी के साथ पहले कार में दिखाई दिए थे। इन्हीं से जयदीप की हत्या की बात सामने आई है। यदि सी.सी.टी.वी. फुटेज न मिलती तो शायद इतनी जल्दी मामले का खुलासा न होता।
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