हाल में प्रस्तुत आर्थिक सर्वे में ‘कैश ट्रांसफर’ योजनाओं पर बढ़ते व्यय और राज्यों की वित्तीय स्थिति पर उसके प्रभाव का उल्लेख स्वयं सरकार ने किया है। यह स्वीकारोक्ति बताती है कि बिना ठोस वित्तीय योजना के घोषणाओं का बोझ अंतत: प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हरियाणा में इसका असर किसानों के लंबित मुआवज़े और महिलाओं से किए गए वादों के अधूरे क्रियान्वयन के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह बात सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने आज जारी एक बयान में कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक किसान आज भी अपने वैधानिक मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बार-बार आश्वासन के बावजूद भुगतान में देरी सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रश्न खड़े करती है। ‘लाडो लक्ष्मी’ जैसे वादों में शर्तें जोड़कर लाभ को टालना महिलाओं के विश्वास को ठेस पहुंचाता है और आर्थिक सर्वे में व्यक्त चिंताओं को पुष्ट करता है। कुमारी सैलजा ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि लोक कल्याण योजनाएँ केवल घोषणा नहीं, बल्कि पारदर्शी बजट प्रबंधन, समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही के साथ लागू हों। किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को उनका अधिकार बिना जटिलताओं के मिलना चाहिए, तभी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सांसद ने हरियाणा सरकार की नीतियों पर कहा कि अब सरकार के पास सिर्फ कर्ज बढ़ाने का रास्ता बचा है। देने के लिए तो उनके पास कुछ नहीं है। किसान, मजदूर और गरीब आदमी से जुड़ी योजनाएं काटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हरियाणा की जनता को आश्वस्त करती है कि किसानों के मुआवज़े, महिलाओं के आर्थिक अधिकार और पारदर्शी शासन जैसे जनहित मुद्दों को निरंतर मजबूती से उठाया जाएगा। संकल्प, संवेदनशीलता और संतुलित आर्थिक नीति से ही प्रदेश को स्थायी प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
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