सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सार्वजनिक हो रही सूचनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कुमारी सैलजा ने कहा कि यह प्रस्तावित समझौता विशेषकर हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। किसानों को वर्ष 2022 तक आय दोगुनी करने और एमएसपी की गारंटी देने का सपना दिखाने वाली सरकार एक बार फिर किसानों के हितों से समझौता करती हुई दिखाई दे रही है। यदि कृषि क्षेत्र को बिना पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया गया तो इसका सीधा असर खेतिहर परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा।
समझौते की घोषणा एकतरफा बयानबाज़ी के रूप में सामने आई
कुमारी सैलजा ने कहा कि इस समझौते की घोषणा एकतरफा बयानबाज़ी के रूप में सामने आई है और अमेरिकी पक्ष द्वारा यह संकेत दिया जा रहा है कि भारत टैरिफ तथा नॉन-टैरिफ बैरियर को शून्य के करीब लाने पर सहमत हो रहा है। यह स्थिति देश के हितों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यदि भारतीय बाज़ार को इस प्रकार व्यापक रूप से खोला जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव देश के उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों, व्यापारियों तथा अन्नदाताओं पर पड़ेगा। कृषि क्षेत्र को खोलने की चर्चा हो रही है, परंतु किसानों के हितों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
कुमारी सैलजा ने प्रश्न उठाया कि....
यह अस्पष्टता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा, दोनों के लिए चिंता का विषय है। तेल खरीद के संदर्भ में रूस से दूरी और अमेरिका व वेनेजुएला पर निर्भरता बढ़ने की बात भी सामने आई है। कुमारी सैलजा ने प्रश्न उठाया कि यदि यह किसी व्यापारिक समझौते का हिस्सा है, तो इससे देश की ऊर्जा नीति और रणनीतिक संतुलन पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसी किसी भी शर्त पर निर्णय लेते समय राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। यदि अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाया जाता है, तो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता के संकल्प पर भी प्रश्नचिन्ह लगेंगे। कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार पर इसके प्रभाव का आकलन सार्वजनिक होना चाहिए।
ट्रेड डील के हर पहलू पर पारदर्शिता अनिवार्य
कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील के हर पहलू पर पारदर्शिता अनिवार्य है। देश और संसद को यह जानने का पूरा अधिकार है कि किन शर्तों पर क्या सहमति बनी है। सरकार को बिना देरी किए इस विषय पर श्वेत पत्र जारी कर सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि जनप्रतिनिधि और नागरिक इस पर सूचित चर्चा कर सकें। राष्ट्रीय हित, किसानों की सुरक्षा, उद्योग-व्यापार की स्थिरता और ऊर्जा रणनीति, इन सबको ध्यान में रखकर ही कोई भी अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
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