
हरियाणा में कांग्रेस के स्टार प्रचारक सचिन पायलट की एक रैली के दौरान पार्टी की गुटबाजी की समस्या सामने आई। पायलट के मंच पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक और पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा भी मौजूद थे। जब वह पायलट के पास आगे आए, तो पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनीत पुनिया ने उन्हें धक्का देकर पीछे धकेल दिया। इसके बाद पायलट ने भी गिल्लाखेड़ा को डांटा और पीछे की तरफ धकेल दिया।
गुटबाजी की खबरों पर पड़ा असर
यह घटना कांग्रेस में चल रहे गुटबाजी के विवाद को और भी बढ़ा देगी। हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और किरण चौधरी के बीच गुट बंटे हुए हैं। ऐसे में स्टार प्रचारक की मौजूदगी में ही यह घटना हुई, तो इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। गुटबाजी से पहले ही जूझ रही कांग्रेस के लिए यह अच्छी खबर नहीं है और आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
BJP पर साधा निशाना
इस रैली में पायलट ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जुमलों से लोगों को गुमराह किया और सरकार बनाई, लेकिन अब वह हर मोर्चे पर विफल नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संविधान को कमजोर करना चाहती है और देश की संपत्तियों को निजी हाथों में दे रही है। उन्होंने लोगों से कांग्रेस को मौका देने की अपील की।
हुड्डा और चौधरी गुट में बंटी कांग्रेस
लगभग सभी राजनीतिक दलों की तरह, हरियाणा कांग्रेस में भी दो प्रमुख गुट हैं - एक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का समर्थन करता है, जबकि दूसरा किरण चौधरी और रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में है। यही गुटबाजी पार्टी की एकता और लोकसभा चुनाव में उसकी प्रगति के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सचिन की रैली में गुटबाजी का पर्दाफाश
सचिन पायलट की उस रैली का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला और भी गरमा गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा मंच पर आगे आए, तो पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनीत पुनिया ने उन्हें धक्का मारकर पीछे धकेल दिया। इसके बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी गिल्लाखेड़ा को डांटा और उन्हें पीछे की तरफ धकेल दिया। यह पूरा मामला कांग्रेस के भीतर चल रहे गुटबाजी के विवाद को और भी बढ़ा देगा। ऐसे में पार्टी के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वह लोकसभा चुनाव से पहले अपने घर को कैसे संभालती है। आखिरकार, गुटबाजी की यह समस्या न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि किसी भी पार्टी के लिए घातक साबित हो सकती है।
एकजुटता से ही कांग्रेस लड़ सकती है मुकाबला
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर, कांग्रेस को हरियाणा जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। लेकिन यदि गुटबाजी जारी रही, तो पार्टी की राज्य में प्रगति पर असर पड़ सकता है। इसलिए पार्टी को यथाशीघ्र इस मुद्दे को सुलझाना होगा और एकजुट होकर चुनाव लड़ना होगा।
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