दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में चल रहे 5 दिवसीय ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026’ शुक्रवार को समापन हो गया है। इस दौरान सुबह से शाम तक कई वर्ल्ड लीडर्स ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने एआई के फायदे व नुकसान पर मंथन किया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भी कई वैश्विक हस्तियों से मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता की। एआई कंटेंट पर लेबल लगाना भी 20 फरवरी, 2026 से अनिवार्य कर दिया गया। तत्काल प्रभाव से ये नियम लागू हो गए हैं। गत 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर व एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर का निवेश आएगा
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने समिट के आखिरी दिन शुक्रवार को 16 एआई स्टार्टअप्स के सीईओ और फाउंडर्स के साथ राउंडटेबल मीटिंग की। उन्होंने इनोवेटर्स को जोखिम लेकर भारत की जरूरतों के हिसाब से समाधान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। पीएम ने जोर दिया कि जैसे यूपीआई ने दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, वैसे ही भारतीय एआई कंपनियां भी ग्लोबल लीडरशिप लें। 2 वर्षों में 200 बिलियन डॉलर के निवेश होने की उम्मीद ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट- 2026’ अपनी तरह का पहला एआई समिट है जो विकासशील देश में हुआ। 5 दिन के इस सम्मेलन के दौरान दुनियाभर के लीडर्स, मंत्रियों और टेक कंपनियों के सीईओ ने हिस्सा लिया। टेक कंपनियों ने भारत में कई नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स व डील्स का ऐलान किया है। भारत ने इस समिट के जरिए खुद को ग्लोबल एआई और चिप मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में पेश किया है। सरकार के अनुमान के अनुसार अगले 2 वर्षों में देश में एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर व एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 200 बिलियन डॉलर का निवेश आएगा।
‘लेबल’ लगाना जरूरी
नए नियमों के तहत अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ही सम्मेलन के दौरान लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा।
‘वाटरमार्क’ हटाने पर माना जाएगा गैर-कानूनी कार्य
मान लीजिए आपने एआई से वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए ‘एआई जनरेटेड’। मेटाडाटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस एआई टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ। अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी। पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वाटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैरकानूनी बना दिया है।
गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए अब केवल 3 घंटे का समय
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडाटा को हटाने की कोशिश करे तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए। अगर एआई का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था जिसे अब घटाकर केवल 3 घंटे कर दिया गया है।
मिस- इनफॉर्मेशन, इंपर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा
अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव एआई से आने वाली मिस- इनफॉर्मेशन, इंपर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा।
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