loader
The Haryana Story | HERC अध्यक्ष ने पानीपत में की जनसुनवाई, बोले- उपभोक्ताओं के सुझाव आयोग के निर्णय में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

HERC अध्यक्ष ने पानीपत में की जनसुनवाई, बोले- उपभोक्ताओं के सुझाव आयोग के निर्णय में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यकुशलता में वृद्धि, लागत में कमी और सेवा गुणवत्ता में सुधार पर बल, सस्ती बिजली खरीद सुनिश्चित करने हेतु सटीक मांग आकलन पर जोर

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने कहा कि बिजली क्षेत्र में कार्यकुशलता में वृद्धि, लागत में कमी और सेवा गुणवत्ता में गुणात्मक सुधार समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली की आवश्यकता का सटीक पूर्वानुमान लगाकर सस्ती बिजली की खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

उपभोक्ताओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने सुझाव और टिप्पणियां प्रस्तुत कीं

नन्द लाल शर्मा मंगलवार को पानीपत स्थित स्काईलार्क के बहुउद्देश्यीय हॉल में आयोजित जनसुनवाई की अध्यक्षता कर रहे थे। यह जनसुनवाई उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एचईआरसी में दायर याचिका के संदर्भ में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर आयोग के सदस्य मुकेश गर्ग एवं शिव कुमार, एचईआरसी के सचिव प्रशांत देष्टा, यूएचबीवीएन के निदेशक अनिल कुमार यादव, एसई धर्म सुहाग, एसई पुनित कुंडू, आयोग के उप निदेशक (मीडिया) प्रदीप मलिक सहित आयोग एवं निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पानीपत की औद्योगिक इकाइयों के उद्यमियों सहित विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने सुझाव और टिप्पणियां प्रस्तुत कीं, जिन्हें आयोग द्वारा विधिवत दर्ज किया गया। 

ऊर्जा के नए विकल्पों पर विशेष जोर

अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि ऊर्जा के नए स्रोतों—विशेषकर सौर ऊर्जा—की संभावनाओं को व्यापक स्तर पर विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान में इसकी लागत अधिक है, किंतु भविष्य में यह किफायती विकल्प बन सकती है। उन्होंने न्यूक्लियर और हाइड्रोजन ऊर्जा की बढ़ती मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में ये ऊर्जा के महत्वपूर्ण विकल्प बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उपभोक्ताओं को सेवा प्रदाता बदलने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है, जिससे प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। वर्ष 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के अनुरूप विद्युत क्षेत्र में भी व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

उपभोक्ता सुझाव निर्णय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण

अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 के अनुसार उपभोक्ताओं के सुझाव आयोग के निर्णय में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से आयोग स्वयं फील्ड में जाकर उपभोक्ताओं से संवाद स्थापित कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राप्त फीडबैक आगामी टैरिफ ऑर्डर में अवश्य परिलक्षित होगा। एचईआरसी सदस्य मुकेश गर्ग ने कहा कि पानीपत से प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा और आयोग अपना विस्तृत आदेश जारी करेगा। सदस्य शिव कुमार ने भी कहा कि उपभोक्ताओं द्वारा प्रस्तुत लिखित सुझावों को ध्यान में रखते हुए उनकी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी। 

हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की स्थिति

यूएचबीवीएन के एसई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हरियाणा में वर्तमान में कुल 83,79,739 बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 38,67,120 यूएचबीवीएन तथा 45,12,619 डीएचबीवीएन के अंतर्गत आते हैं। यूएचबीवीएन की वितरण हानि 9.33 प्रतिशत है। एवरेज कॉस्ट ऑफ सप्लाई के अनुसार प्रति यूनिट बिजली की आपूर्ति पर 8 रुपये 09 पैसे का व्यय होता है, जबकि प्रति यूनिट 7 रुपये 10 पैसे की प्राप्ति होती है। पानीपत, पंचकूला और करनाल में 4,87,000 स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। जनसुनवाई में यह भी बताया गया कि हरियाणा में प्रति व्यक्ति वार्षिक बिजली खपत लगभग 2200 यूनिट है, जो राष्ट्रीय औसत 1460 यूनिट से काफी अधिक है।

आयोग की पृष्ठभूमि

यह भी जानकारी दी गई कि आयोग की स्थापना 16 अगस्त 1998 को हुई थी तथा 17 अगस्त 1998 से इसका कार्य प्रारंभ हुआ। आयोग ने अपना पहला टैरिफ ऑर्डर 22 दिसंबर 2000 को जारी किया था और प्रत्येक वर्ष नए वित्त वर्ष के प्रारंभ से पूर्व टैरिफ ऑर्डर जारी किया जाता है। उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष श्री नन्द लाल शर्मा सोमवार शाम को ही पानीपत पहुंच गए थे और उन्होंने हरियाणा बिजली उत्पादन निगम (एचपीजीसीएल) के प्लांट का भी निरीक्षण किया। यह जनसुनवाई न केवल टैरिफ निर्धारण की औपचारिक प्रक्रिया थी, बल्कि उपभोक्ताओं और नियामक के बीच प्रत्यक्ष संवाद का एक सशक्त मंच भी साबित हुई, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Join The Conversation Opens in a new tab
×