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The Haryana Story | हरियाणा की 'जलपरी' का वर्ल्ड रिकॉर्ड: काम्या भारद्वाज ने तोड़ा सालों पुराना विश्व रिकॉर्ड

हरियाणा की 'जलपरी' का वर्ल्ड रिकॉर्ड: काम्या भारद्वाज ने तोड़ा सालों पुराना विश्व रिकॉर्ड

ऐतिहासिक उपलब्धि गुरुग्राम की काम्या ने 18 घंटे 15 मिनट में Palk Strait पार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो समंदर की लहरें भी रास्ता दे देती हैं। गुरुग्राम की बेटी काम्या भारद्वाज ने इस कहावत को हकीकत में बदल कर दिखा दिया है। सोहना खंड के गांव बालूदा की रहने वाली काम्या ने श्रीलंका और भारत के बीच स्थित 'पाक जलडमरूमध्य' (Palk Strait) को पार कर एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। हरियाणा की माटी में पली-बढ़ी काम्या जलपरी की तरह समुद्र में तैरते हुए सोमवार की सुबह 07:45 बजे अरिचलमुनाई के तट पर वापस पहुंची। इसी के साथ ही काम्या ने सुजिता देव वर्मन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।

पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त, बनाया नया कीर्तिमान

सुजिता देव वर्मन ने 19 घंटे 20 मिनट में यह सफर पूरा किया था और काम्या ने उनसे एक घंटे पांच मिनट पहले यानी 18 घंटे 15 मिनट में ही यह यात्रा पूरी करते हुए नया विश्व रिकॉर्ड बना डाला। सबसे खास बात यह है कि काम्या ने पानी के इस सफर में कोई ब्रेक नहीं लिया। यानी वह श्रीलंका के तलाईमन्नार पहुंचते ही वापस भारतीय तट की तरफ तैरने लगी। ऐसे ही हौंसले ने उसे विश्व चैंपियन बनाया। काम्या ने धनुषकोडी (भारत) से तलाईमन्नार (श्रीलंका) और फिर वापस धनुषकोडी तक की अत्यंत कठिन समुद्री यात्रा को महज 18 घंटे 15 मिनट में पूरा किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने सुजिता देव वर्मन के 19 घंटे 20 मिनट के पुराने रिकॉर्ड को चकनाचूर कर दिया है। काम्या ने न केवल यह दूरी तय की, बल्कि समय के फासले को भी लगभग 1 घंटा 5 मिनट कम कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

चुनौतियों भरा रहा सफर

यह ऐतिहासिक सफर 12 अप्रैल, रविवार दोपहर 1:30 बजे अरिचलमुनाई से शुरू हुआ। गहरे नीले पानी और समुद्र की विपरीत लहरों के बीच काम्या का मुकाबला सिर्फ दूरी से नहीं, बल्कि प्रकृति की अनिश्चितताओं से भी था। रात के अंधेरे और समुद्र के उतार-चढ़ाव के बीच काम्या बिना थके तैरती रहीं। 'ओपन वाटर स्विमिंग एकेडमी थेनी' की देखरेख में आयोजित इस तैराकी में काम्या के बुलंद हौसलों ने अंततः उन्हें मंजिल तक पहुँचाया।

कौन हैं काम्या भारद्वाज?

दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में बीएससी जूलॉजी की छात्रा काम्या, सुनील भारद्वाज की सुपुत्री हैं। तैराकी का जुनून उनमें बचपन से ही था, जो अब एक अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि में बदल चुका है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली काम्या आज युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं।

गांव में जश्न का माहौल

काम्या की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव बालूदा पहुँची, वहां खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि काम्या ने न केवल अपने परिवार और गांव का, बल्कि पूरे हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है। काम्या भारद्वाज की इस उपलब्धि पर भारतीय तैराकी महासंघ के अधिकारी पर्यवेक्षक डा. विजय कुमार और एम. जयकुमार ने बारीकी से नजर रखी। उन्होंने काम्या द्वारा रिकॉर्ड तोड़ने वाले समय की पुष्टि की।

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