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The Haryana Story | नीरज चोपड़ा का गोल्डन जैवलिन 1.5 करोड़ में हुआ था नीलाम, गंगा संरक्षण के लिए समर्पित की गई थी पूरी राशि

नीरज चोपड़ा का गोल्डन जैवलिन 1.5 करोड़ में हुआ था नीलाम, गंगा संरक्षण के लिए समर्पित की गई थी पूरी राशि

टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा का वह प्रतिष्ठित भाला 7 अक्टूबर 2021 को ही अंतिम रूप से हुआ था नीलाम

टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा का वह भाला आज भी देशवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक है। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़े भाले को अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों की आधिकारिक ई-नीलामी के दौरान 1.5 करोड़ रुपये में नीलाम किया गया था। इस नीलामी की खास बात यह रही कि इससे प्राप्त पूरी राशि गंगा नदी के संरक्षण और कायाकल्प के लिए चलाए जा रहे नमामि गंगे मिशन को समर्पित की गई थी।

जबकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नीरज चोपड़ा का ओलंपिक गोल्ड मेडल जिताने वाला भाला पीएम मोदी को तोहफ़े में दिया गया था और बाद में उसे ₹1.5 करोड़ में नीलाम किया गया। हालांकि, यह दावा गुमराह करने वाला है। टोक्यो ओलंपिक में अपनी ऐतिहासिक जीत के दौरान चोपड़ा ने जिस भाले का इस्तेमाल किया था, उसे बाद में लॉज़ेन में ओलंपिक म्यूज़ियम को तोहफ़े में दे दिया गया था। पीएम को जो भाला तोहफ़े में दिया गया था, वह अलग था और उसकी नीलामी से मिली रकम 'नमामि गंगे मिशन' के लिए इस्तेमाल की गई। 

टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने रचा था इतिहास

नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। नीरज ने फाइनल मुकाबले में 87.58 मीटर का भाला फेंककर पहला स्थान हासिल किया। यह ओलंपिक में एथलेटिक्स की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक था। उनकी जीत के बाद देशभर में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला। ओलंपिक में मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद नीरज चोपड़ा ने अपना भाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया था। यह भाला उनकी मेहनत, लगन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उपलब्धि का प्रतीक बन गया।

एक करोड़ रुपये रखी गई थी भाले की बेस प्राइस

अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों की आधिकारिक ई-नीलामी आयोजित की गई थी। बताया जा रहा है कि इस नीलामी में नीरज चोपड़ा का टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाला भाला भी शामिल किया गया था। इस ऐतिहासिक भाले का शुरुआती आधार मूल्य (बेस प्राइस) एक करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। ऑनलाइन नीलामी के दौरान इसकी बोली बढ़ती गई और आखिरकार यह 1.5 करोड़ रुपये की सर्वोच्च बोली पर नीलाम हुआ। इस तरह भाले की अंतिम बोली उसके निर्धारित शुरुआती मूल्य से 50 लाख रुपये अधिक रही। इसकी ऊंची बोली ने इस खेल उपलब्धि से जुड़े राष्ट्रीय गौरव और प्रतीकात्मक महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद नीलामी में शामिल हुआ भाला

नीरज चोपड़ा का यह भाला प्रधानमंत्री को भेंट किए जाने के बाद सार्वजनिक नीलामी का हिस्सा बना। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नीरज चोपड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा के बाद इसे ई-नीलामी में शामिल करने पर सहमति दी थी। प्रधानमंत्री को मिलने वाले उपहारों की नीलामी के जरिए इन वस्तुओं को जनकल्याण से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। नीरज चोपड़ा का भाला भी इसी पहल का हिस्सा बना।

नमामि गंगे मिशन को समर्पित की गई पूरी धनराशि

इस नीलामी से प्राप्त 1.5 करोड़ रुपये की पूरी राशि नमामि गंगे मिशन के लिए समर्पित की गई थी। इस मिशन का उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ बनाना, प्रदूषण कम करना और नदी के संरक्षण एवं कायाकल्प के लिए विभिन्न प्रयास करना है। इस पहल के माध्यम से एक ऐतिहासिक खेल उपलब्धि से जुड़ी वस्तु की नीलामी को पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण जनहित के कार्य से जोड़ा गया।

खेल उपलब्धि से जनकल्याण तक पहुंचा सम्मान

नीरज चोपड़ा का ओलंपिक विजयी भाला भारत के खेल इतिहास की एक यादगार उपलब्धि का प्रतीक है। इसे 1.5 करोड़ रुपये में नीलाम किया जाना और उससे प्राप्त राशि को नमामि गंगे मिशन के लिए समर्पित करना इस घटना को खास बनाता है। यह उदाहरण दिखाता है कि किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि से जुड़ी वस्तु का उपयोग व्यापक सामाजिक उद्देश्य के लिए भी किया जा सकता है। एक ओर यह भाला देश के लिए गौरवशाली क्षण की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़ी नीलामी ने गंगा संरक्षण के प्रयासों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया।

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