वृंदावन के यमुना तट पर हुआ यह दर्दनाक हादसा पूरे भिवानी और लुधियाना को गमगीन कर गया है। 10 अप्रैल 2026 को बांके बिहारी के दर्शन करने निकले एक ही परिवार के खुशहाल चेहरों का सफर यमुना की लहरों के बीच मातम में बदल गया। एक साथ उठीं 7 अर्थियां और पीछे छूट गया रोता-बिलखता परिवार... भिवानी की जगत कॉलोनी में रहने वाली 55 साल की आशा मिड्ढा को क्या पता था कि जिस मायके के लोगों के साथ वो बांके बिहारी के दर पर खुशियां मनाने जा रही हैं, वही सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। भिवानी के मशहूर जगदंबा ढाबा चलाने वाले परिवार की ये कहानी आज हर किसी की जुबान पर है और आँखें नम कर रही है।
श्रद्धालु यमुना नदी पार कर रहे थे, तभी नाव असंतुलित होकर पलट गई
भिवानी की जगत कॉलोनी की रहने वाली 55 वर्षीय आशा मिड्ढा, अपने पति अर्जुन दास मिड्ढा, जो लंबे समय से बीमार हैं को घर पर छोड़कर अपने मायके वालों के साथ इस धार्मिक यात्रा पर गई थीं। उनके दो बेटे, अजय और दिनेश, भिवानी रेलवे स्टेशन के बाहर मशहूर 'जगदंबा ढाबा' चलाते हैं। आशा मिड्ढा लुधियाना के जगराओं में स्थित अपने मायके वालों के साथ बांके बिहारी के दर्शन करने वृंदावन पहुंची थीं। वे सोनीपत से बस में सवार हुई थीं। शुक्रवार सुबह दर्शन के बाद, जब श्रद्धालु यमुना नदी पार कर रहे थे, तभी नाव असंतुलित होकर पलट गई।
7 अर्थियां और चीख-पुकार
इस नाव हादसे में कुल 10 श्रद्धालुओं की मौत हुई, जिनमें से 7 सदस्य एक ही परिवार के थे, जिनमें आशा मिड्ढा और उनके लुधियाना/जगराओं स्थित मायके के रिश्तेदार शामिल हैं। मरने वालों में कविता बहल, चरणजीत, पिंकी, मधुर बहल, इशांत कटारिया, सपना और हसन जैसे नाम शामिल हैं जो लुधियाना के गीता कॉलोनी और जगराओं के निवासी थे।
लापरवाही का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि नाविक ने क्षमता से अधिक लगभग 30 लोग बैठाए थे और सुरक्षा के लिए कोई लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थी। यात्रियों ने नाविक को पहले ही खतरे के बारे में चेतावनी दी थी, जिसे उसने नजरअंदाज कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही आशा मिड्ढा के दोनों बेटे वृंदावन के लिए रवाना हो गए और भिवानी की जगत कॉलोनी में सन्नाटा पसर गया।
नाव भी जर्जर अवस्था में थी
ये भी बताया जा रहा है श्रद्धालुओं ने हादसे से पहले नाव चालक को पत्थर के नजदीक आने की बात कही थी पर गति अधिक होने और नाव चालक द्वारा गौर न किए जाने के चलते हादसा हुआ। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि नाव भी जर्जर अवस्था में थी। इस त्रासदी ने न केवल एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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