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The Haryana Story | नौरंगपुर की बेटी का कमाल: बिना कोचिंग बनीं विदेश मंत्रालय में अफसर, दीपा ने पेश की मिसाल

नौरंगपुर की बेटी का कमाल: बिना कोचिंग बनीं विदेश मंत्रालय में अफसर, दीपा ने पेश की मिसाल

सेल्फ स्टडी की जीत, घर पर पढ़कर नौरंगपुर की दीपा ने दूसरे प्रयास में क्रैक की SSC परीक्षा, गांव नौरंगपुर की 'लाड़ली' ने बढ़ाया पूरे क्षेत्र का मान

मेहनत और पक्के इरादे हों तो मंजिल खुद-ब-खुद मिल जाती है। इसे सच कर दिखाया है गुरुग्राम के गांव नौरंगपुर की बेटी दीपा ने। दीपा ने कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) में अधिकारी का पद प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरा गांव अपनी इस 'लाडो' पर गर्व कर रहा है।

बिना कोचिंग 'सेल्फ स्टडी' से पाई सफलता

दीपा की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसके लिए किसी नामी कोचिंग सेंटर का सहारा नहीं लिया। जहाँ आजकल छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों में जाकर लाखों रुपये खर्च करते हैं, वहीं दीपा ने घर पर रहकर ही 'सेल्फ स्टडी' को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने इंटरनेट और किताबों की मदद से खुद को तैयार किया।

असफलता से नहीं हारीं हिम्मत

दीपा का यह सफर इतना आसान नहीं था। पहले प्रयास में वे कुछ ही अंकों से चूक गई थीं। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया। दूसरे प्रयास में उन्होंने दोगुनी मेहनत की और आखिरकार महज 24 साल की उम्र में अपना सपना सच कर दिखाया। दीपा ने बताया कि पहली बार एसएससी की परीक्षा में कुछ अंकों से उनका चयन नहीं हो पाया। दूसरी बार और अधिक मेहनत करते हुए इसी साल उसने एसएससी की परीक्षा को पास कर लिया। गौरतलब है कि 24 साल की उम्र में दीपा की यह उपलब्धि हर युवा के लिए प्रेरणादायी है। इस उम्र में पढ़ाई पूरी करके उन्होंने एक अच्छी जॉब हासिल कर ली है।

पढ़ाई में खुद का पूरा समय दें 

दीपा ने बताया कि उन्हें भारत के विदेश मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (एएसओ) के पद पर नियुक्ति का पत्र मिला है। डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के बाद जल्द ही उनकी ज्वाइनिंग होगी। दीपा का विद्यार्थियों को यही संदेश है कि वे पढ़ाई में खुद का पूरा समय दें। मेहनत करेंगें तो सफलता जरूर मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि गांव के किसी भी बच्चे को उनकी गाइडेंस की जरूरत होगी तो वे इसके लिए हमेशा उपलब्ध हैं। गांव के बच्चों को आगे बढ़ाने में उनका सदा योगदान रहेगा

युवाओं के लिए प्रेरणा

भीम सिंह की सुपुत्री दीपा ने साबित कर दिया कि सफलता के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी अनुशासन और निरंतरता है। गांव के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि दीपा ने कम उम्र में यह मुकाम हासिल कर गांव की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा की एक नई राह खोल दी है। चार भाई-बहनों में दीपा दूसरे नंबर की है। दीपा का बड़ा भाई तरुण डी-फार्मेसी करके मेडिकल स्टोर पर काम करता है। छोटी बहन सुष्मिता एम.ए. कर रही है और सबसे छोटी बहन साक्षा बी.ए. की पढ़ाई कर रही है। दीपा के पिता आठवीं तक और मां दसवीं तक पढ़ी हैं। पूरा परिवार गांव नौरंगपुर में ही रहता है।

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